लातेहार: Latehar जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत लुंदी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। करीब 20 वर्षों से भवन अधूरा पड़ा है, जिसके कारण मासूम बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों पर संकट मंडरा रहा है।

 जर्जर बरामदे में चल रहा आंगनबाड़ी

गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तो संचालित है, लेकिन अपना भवन नहीं होने के कारण इसे एक पुराने और जर्जर स्कूल भवन के बरामदे में चलाया जा रहा है। यहां करीब 40 से 50 बच्चों का नामांकन है, जिन्हें बैठने, खेलने और पढ़ने के लिए सुरक्षित स्थान तक उपलब्ध नहीं है।

20 साल से अधूरा पड़ा भवन

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 20 साल पहले आंगनबाड़ी भवन निर्माण का काम शुरू हुआ था और ढलाई तक हो चुकी थी, लेकिन उसके बाद काम अधूरा छोड़ दिया गया। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

 बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा

  • बच्चों को खुले बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है
  • भोजन भी खुले में ही तैयार किया जाता है
  • बारिश, गर्मी और ठंड – हर मौसम में बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ती है

 ग्रामीणों में नाराजगी

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव पूरी तरह आदिवासी बहुल है, जहां इस केंद्र की जरूरत और भी ज्यादा है।

 प्रशासन ने क्या कहा?

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी Alka Hembrom ने कहा कि:

  • मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी
  • भवन बनने तक केंद्र को किसी सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की व्यवस्था की जाएगी

 बड़ा सवाल

सरकार की योजनाएं कागजों पर तो पूरी दिखती हैं, लेकिन जमीन पर उनकी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। सवाल यह है कि आखिर 20 साल बाद भी बच्चों को बुनियादी सुविधा कब मिलेगी?